आगे बढ़ने से पहले आप ये पढ़ आइये…सारे कमेन्ट्स भी पढ़ियेगा ध्यान से और एक कमेंट पर अटक जाइयेगा…
http://indiascifiarvind.blogspot.com/2010/09/blog-post.html
जिसमे आपको ये 'सुन्दर' कथन मिले…
"इस कथा से स्त्री-जाति को अवश्य ही प्रेरणा मिलोगी!"
बड़े लोगों कि बातों में पड़ने के लिये बहुत बहुत क्षमाप्रार्थी हूँ…
क्या आपको इतनी बढ़िया कहानी पर ये स्टेटमेन्ट तमाचे सा नहीं प्रतीत होता ?
अरे भई! अब प्रेरणा भी नारियाँ ही लें ? क्यों जी? सभी जागरुक स्त्रियाँ क्या समाज को आग ही लगा देना चाहती हैं ? समाज की भलाई की सोचते हुए ही हमारी नायिका ज़रीना ने ये कठोर निर्णय लिया है… एक स्त्री के सिवा हो सकता है कोई इतना मज़बूत ?
निसन्देह प्रेरणा तो लेनी ही है… प्रेरणास्पद कहानी ही है... पर सभी को लेनी है…
… उपरोक्त कमेन्ट से ऐसी बू आती है जैसे स्त्रियों को ही सारी प्रेरणा लेने की बेहद ज़रूरत आन पड़ी है…
सभी जागरुक स्त्रियाँ क्या समाज को आग ही लगा देना चाहती हैं ? पर लगता है आग लगाये बिना समाज ने सुधरना भी नहीं है!
मैं तो सोच रही थी कि एक बार स्त्री-less समाज का सामना कर ही लेते हम! ज़रीना जी ने नाहक ही इतने insensitive लोगों की परवाह की जी! पर हमने उनके विचारों से ये जाना कि लड़कियाँ कम होंगी तो बजाय सम्मान मिलने के… तब भी उन्हीं को सारा संकट होगा…! हाय री किस्मत !
:)
गुड लक !
~No offensive intentions towards anyone~
just towards a wrong thought...
sorry !
*Heartiest congratulations to Zakir Sir for this GREAT award winning sci fi story... :)*
10 comments:
निराश किया हताश किया है रश्मी जी आपने
हमे तो लगता था की आप उदारवादी हैं ...........पर आप भी महिलावादी निकलीं !!
"एक स्त्री के सिवा हो सकता है कोई इतना मज़बूत"
..हाँ पुरुष हो सकते हैं
ये कहानी पूरी नहीं लिखी है यहाँ पर मैंने पूरी पढी थी कहीं किसी पत्रिका में .....
और हाँ ........."~No offensive intentions towards anyone~"
...का केवल इतना ही महत्त्व है जितना की किसी भी "वैधानिक चेतावनी का "
:)
जितना निराश मैने आपको किया होगा… उससे कहीं अधिक आपने मुझे कर दिया!
मैं कोई सी भी 'वादी' नहीं हूँ… उदारवादी… नारीवादी… कुछ नहीं! मैं इनमें कुछ समझती भी नहीं… बस कुछ गलत लगा और कह दिया… Major हो गयी हूँ पिछले महीने… बोलूँगी नहीं?
My intenstio isn't to proove men week... even I can't understand why people even compare them, when they are made for each other?
But I can't keep my mouth shut when someone speak something that is... you know what I am saying..
और हाँ, वैधानिक चेतावनियाँ तो बड़ी ज़रुरी होती हैं जी…
Thanx.
take care.. :)
हम भी क्षमा प्रार्थी हैं ........परन्तु आप माने या न माने परन्तु सच्चाई ये है की "आधुनिक नारी" शब्द पर उनका कब्ज़ा है जो पुरुषों के प्रति एक घृणा का भाव रखते हुए विश्वमं करती हैं इसी लिए "कथित आधुनिक नारियों " और साथ ही साथ "कथित परंपरावादी " पुरुषों को उस कहानी से शिक्षा लेने की जरूरत है किसी और को नहीं |
अब आप की बात
"My intenstio isn't to proove men week... even I can't understand why people even compare them, when they are made for each other? "
हम भी बिलकुल ऐसा ही सोचते हैं , परन्तु आपकी इमानदारी तभी सिद्ध होगी जब आप "नारी" नमक ब्लॉग पर जाकर ये बकात बोले का सहस दिखाएंगी और वहां पर कुछ हलचल मचाएंगी
रश्मि जी, हर व्यक्ति का अपना-अपना नजरिया होता है, जो उसके गुणसूत्रों और उसके सामाजिक तथा पारिवारिक परिवेश के अनुसार विकसित होता है। यही कारण है कि दो लोगों के विचार बिलकुल एक जैसे नहीं होते। वैसे कहानी पर आए कमेंट न आपको उद्वेलित किया और आपने अपने मन की बात सटीक ढंग से रखी, यह देखकर अच्छा लगा।
stiri ko devi ka darja dene vaala hamara samaj use dasi ki tarah kyo manne laga -ye shod ka vishy hai. apki prastuti prabhavi hai.
बहुत ही हिदायत भरी ज्ञानवर्धक पोस्ट है!
--
आपकी पोस्ट को बाल चर्चा मंच में लिया गया है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/24.html
एक भयावह सच को दिखाती कहानी पढवाने के लिये आभारी हूँ।
Hello Rashmi, Your really inspiration for youngsters.
Today I accidentally got your blog to be frank when i'll get time I definitely love to read your all posts. All the best for your future and god bless you Dear.
Trupti
रश्मिदी,
आपके बारे में मम्मा ने मुझे आज बताया .... मेरा भी सपना है कि मै बहुत पढाई करू .... मुझे आपके बारे में सुनकर बहुत अच्छा लगा
आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है !
www.rimjim2010.blogspot.com
रश्मि दीदी .....आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें
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